🛕 अयोध्या के प्रमुख कुण्ड और उनका शास्त्रीय महत्व
1️⃣ ब्रह्मकुण्ड

📜 शास्त्रीय संदर्भ
स्कन्दपुराण (अयोध्या माहात्म्य) में वर्णित है कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने अयोध्या आगमन के समय यहाँ यज्ञ किया था।
ब्रह्मणा यत्र कृतं पुण्यं स्नानं दानं विशेषतः।
तस्माद् ब्रह्मकुण्डं नाम पापघ्नं मोक्षदं स्मृतम्॥
🔎 महत्व:
- यहाँ स्नान करने से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट होते हैं (पुराणोक्त विश्वास)।
- यज्ञ, दान और श्राद्ध के लिए श्रेष्ठ स्थल माना गया है।
2️⃣ सीता कुण्ड
📖 परंपरा:
मान्यता है कि वनगमन से पूर्व माता सीता ने यहाँ स्नान और पूजा की थी।
सीतया पूजितं तीर्थं सर्वसौभाग्यवर्धनम्।
🔎 महत्व:
- सौभाग्य, दांपत्य सुख और संतति के लिए महिलाएँ यहाँ पूजन करती हैं।
- नवरात्रि और रामनवमी के अवसर पर विशेष स्नान।
3️⃣ लक्ष्मण कुण्ड

📜 पौराणिक उल्लेख:
कथा है कि लक्ष्मण जी ने यहाँ तपस्या की।
यत्र लक्ष्मणतपो घोरं कृतं धर्मपरायणम्।
तत् लक्ष्मणकुण्डं पुण्यं सर्वकामफलप्रदम्॥
🔎 महत्व:
- वीरता, संयम और त्याग का प्रतीक।
- युवाओं द्वारा साहस और धैर्य की कामना हेतु पूजन।
4️⃣ सूर्य कुण्ड
📜 शास्त्रीय आधार:
इक्ष्वाकु वंश सूर्यवंशी था। श्रीराम उसी वंश में जन्मे।
आदित्यस्य कुलं पुण्यं रघूणां परमं कुलम्।
🔎 महत्व:
- मकर संक्रांति और रवि-स्नान का विशेष महत्व।
- आरोग्य एवं तेज की प्राप्ति हेतु स्नान।
इसके साथ ही अयोध्या के श्रीरामकोट के अंतर्गत स्थित प्रमुख कुंडों में शामिल हैं
- दंतधावन कुंड
- श्री वसिष्ठ कुंड
- श्री विभीषण कुंड
- श्री सागर कुंड
- श्री रुक्मिणी कुंड
पंचकोसी परिक्रमा के अंतर्गत स्थित प्रमुख कुंड हैं
- श्रीसुग्रीव कुंड
- श्री हनुमत् कुंड
- श्री अग्नि कुंड
- श्री विद्या कुंड
- श्री खर्जू कुंड
- श्री दसरथ कुंड
- श्री गणेश कुंड
- श्री भरत कुंड
- श्री बृहस्पति कुंड
- श्री धनयक्ष कुंड ( धनैजा )
चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के परिधि में आने वाले प्रमुख ऐतिहासिक कुंड
- श्री नर कुंड
- श्री नारायण कुंड
- श्री रति कुंड
- श्री दुर्गा कुंड
- श्री कुसुमायुध कुंड
- श्री निर्मली कुंड
- श्री गिरिजा कुंड
- श्री राम कुंड
- श्री जटा कुंड
- श्री शत्रुघ्न कुंड
